'युवा सीधे संवाद चाहते हैं', विक्रमादित्य सिंह ने PM मोदी को दिया सुझाव
शिमला:हिमाचल प्रदेश सरकार में लोक निर्माण विभाग मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसंवाद के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए सोशल मीडिया पर एक विचारोत्तेजक टिप्पणी साझा की है। अपने आधिकारिक फेसबुक हैंडल से जारी संदेश में उन्होंने देश की युवा पीढ़ी और शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी तथा जीवंत बनाने पर बल दिया। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि वर्तमान दौर में युवाओं के साथ महज एकतरफा संदेश प्रसारित करने के बजाय आमने-सामने बैठकर सीधे, खुले और पारदर्शी तरीके से विचार-विमर्श स्थापित करने की नितांत आवश्यकता है।
पंडित नेहरू के ऐतिहासिक व्यक्तित्व का उदाहरण देकर आत्मीय जुड़ाव पर जोर
लोक निर्माण मंत्री ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि 'चाचा' का आत्मीय संबोधन केवल तस्वीरों में नजर आने से प्राप्त नहीं होता। यह स्नेहपूर्ण उपाधि देश के बच्चों और युवाओं के साथ निरंतर संवादात्मक संपर्क बनाए रखने तथा उनके प्रति हृदय में वास्तविक लगाव होने से ही हासिल होती है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पंडित नेहरू के बच्चों के साथ निश्छल संवाद और गहरे जुड़ाव ने उन्हें जन-जन का 'चाचा नेहरू' बनाया, उसी भावना को आज भी आत्मसात करने की जरूरत है।
देश का युवा वर्ग प्रधानमंत्री मोदी में देखना चाहता है अभिभावक और 'चाचा' का रूप
विक्रमादित्य सिंह ने अपनी पोस्ट में उल्लेख किया कि भारत का वर्तमान युवा वर्ग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को केवल देश के प्रशासनिक प्रमुख या 'पीएम' के रूप में ही सीमित नहीं देखना चाहता, बल्कि उन्हें अपने एक अभिभावक और 'चाचा मोदी' के रूप में स्वीकार करने का इच्छुक है। हालांकि, यह आत्मीयता और सम्मान तभी पूर्ण रूप से संभव हो सकता है जब देश के युवा नेतृत्व को अपनी बात बिना किसी झिझक के सीधे देश के शीर्ष नेता तक पहुँचाने का अवसर और मंच मिले।
'मन की बात' कार्यक्रम को एकतरफा के बजाय दोतरफा जनसंवाद में बदलने की मांग
प्रधानमंत्री के बहुचर्चित मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि युवाओं के दिल में विशेष स्थान प्राप्त करने के लिए इस व्यवस्था में बड़े बदलाव की दरकार है। उन्होंने मांग की कि इस कार्यक्रम को एकतरफा संबोधन तक सीमित रखने के स्थान पर युवाओं के साथ सीधी और दोतरफा बातचीत में तब्दील किया जाना चाहिए। जब तक युवाओं की समस्याओं, शंकाओं और सुझावों का सीधे जवाब नहीं मिलेगा, तब तक वास्तविक संवाद की प्रक्रिया अधूरी ही रहेगी।
युवाओं से सीधे जुड़ाव से ही मजबूत होगी देश की लोकतांत्रिक प्रणाली
कैबिनेट मंत्री ने अपने वक्तव्य में इस बात पर विशेष बल दिया कि आज का जागरूक युवा अपनी समस्याओं पर केवल भाषण सुनने के बजाय उनका प्रत्यक्ष और सकारात्मक समाधान चाहता है। यदि केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री देश के छात्रों तथा युवाओं के साथ सीधा संपर्क स्थापित करते हैं, तो इससे न केवल युवाओं का तंत्र पर विश्वास सुदृढ़ होगा, बल्कि देश की लोकतांत्रिक प्रणाली भी अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनेगी।
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