नोबेल विजेता यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश, क्या युद्ध अपराधियों के लिए 'स्वर्ग' बन रहा है?
1971 के युद्ध में सामूहिक हत्या (Mass Murderer) और बलात्कार (Rape) के आरोपी जमात-ए-इस्लामी नेता एटीएम अजहरुल इस्लाम को बांग्लादेश कोर्ट ने बरी किया, जिससे एक बार फिर यह बात जग जाहिर हुई है कि किस तरह यूनुस सरकार में आतंकवादियों और धार्मिक चरमपंथियों (Extremists) के प्रति नरमी बरती जा रही है. इससे साफ हो गया कि एक ओर यूनुस सरकार शांति और विकास की खोखली बातें करती है और वहीं दूसरी ओर आतंकवादियों को पनाह भी देती है.
28 मई को अजहरुल इस्लाम को जेल से रिहा किया गया. उसके स्वागत के लिए जमात-ए-इस्लामी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता और समर्थक ढाका में इकट्ठा हुए. बांग्लादेश की सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में 73 वर्षीय अजहरुल को बरी कर दिया. यहां तक की देश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने पहले दी गई मौत की सजा को भी पलट दिया. चीफ जस्टिस सैयद रेफात अहमद की अगुवाई वाली अपीलीय खंडपीठ की सात सदस्यीय बेंच ने यह आदेश पारित किया.
कौन है एटीएम अजहरुल इस्लाम ?
एटीएम अजहरुल इस्लाम जमात-ए-इस्लामी नाम के इस्लामिक कट्टरपंथी आंदोलन का नेता है. इस पर मानवता के खिलाफ अपराध के नौ आरोप लगे थे. FIR के अनुसार वह बांग्लादेश के रंगपुर क्षेत्र में मुक्ति संग्राम के दौरान 1,256 लोगों की हत्या, 17 लोगों के अपहरण और 13 महिलाओं के साथ बलात्कार के लिए जिम्मेदार पाया गया था. इसके अलावा उस पर दंगा भड़काने, लोगों का शोषण करने, सैकड़ों घरों में आग लगाने और अन्य अपराधों को करने का आरोप था.
कोर्ट को दिया धन्यवाद
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने 30 दिसंबर, 2014 को नौ में से पांच मामलों में उसे मौत की सज़ा सुनाई थी, जिसे लेकर 28 जनवरी, 2015 को अजहरुल ने अपीलीय सेक्शन में एक याचिका दायर की थी. जिसमें उसने खुद को निर्दोष बताया था. अपनी रिहाई पर अजहरुल इस्लाम ने फैसले का स्वागत करते हुए कोर्ट का धन्यवाद दिया. अजहरुल इस्लाम ने कहा, ‘सबसे पहले, मैं कोर्ट को धन्यवाद देना चाहता हूं. वे देश में न्याय स्थापित करने में अहम रोल अदा कर रहे हैं. हमारे कई भाई न्यायिक हत्याओं के जरिए से इस दुनिया से चले गए हैं.’
बाहर निकल कर क्या बोला अजहरुल?
एटीएम अजहरुल इस्लाम ने कहा, ‘लगभग 14 साल बाद, मैं आज रिहा हुआ. मैं अब स्वतंत्र हूं, अल्हम्दुलिल्लाह. मैं अब एक स्वतंत्र देश का स्वतंत्र नागरिक हूं. अगर अल्लाह मुझे ताकत देता है, तो मैं निश्चित रूप से अपने जीवन के बाकी हिस्सों के लिए आपके साथ रहूंगा, इंशा अल्लाह.’
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