पारम्परिक चिकित्सा के संरक्षण की दिशा में झाबुआ में ऐतिहासिक पहल
भोपाल : महिला बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि वर्तमान में पारम्परिक चिकित्सा पद्धति और औषधीय वनस्पतियों से जुड़े सदियों पूराने ज्ञान को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुँचाना अत्यंत आवश्यक है। झाबुआ जिले में पारम्परिक औषधीय ज्ञान को संरक्षित करने की ऐतिहासिक पहल की गई है। "डुंगर बाबा नी जड़ी बूटियों नु जोवनार" कार्यशाला का आयोजन सराहनीय है। उन्होंने कहा कि झाबुआ की धरती पर लोक ज्ञान का अपार भंडार है। इस कार्यशाला में 75 से अधिक पारम्परिक जड़ी-बूटी विशेषज्ञों को एकत्रित किया गया है।
मंत्री भूरिया ने कहा कि जिले के सभी विकासखंडों से एकत्रितहुएइन विशेषज्ञों ने इस अंचल में पाये जाने वाले जड़ी बूटियों का परम्परागत ज्ञान साझा किया है। उन्होंने कहा कि यह परम्परागत ज्ञान विलूप्त न हो जाये और आने वाली पीढ़ियों तक इसके हस्तांतरण के उद्देश्य से कार्यशाला का आयोजन किया गया है। मंत्री भूरिया ने कहा कि पूरी दुनिया ने कोरोना काल में आयुर्वेद की शक्ति को पहचाना है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में आयुष चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया है और देश भर में आयुर्वेद का विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि ज्ञान बांटने से बढ़ता है और इसी से परम्परागत ज्ञान को लिपीबद्ध करने से इसको संरक्षित किया जा सकेगा। मंत्री भूरिया ने कहा कि भविष्य में सभी जानकारियों का सुव्यवस्थित संकलन कर हिन्दी और अंग्रेजी में दस्तावेज तैयार किये जायेगें। इसमें जड़ी बूटियों के नाम, स्त्रोत, प्रयोग विधि, मात्रा, उपलब्धता और उपचार की प्रक्रिया को विस्तार से दर्ज किया जायेगा।
कलेक्टर नेहा मीणा ने जानकारी देते हुए बताया है कि पिछले 6 माह में जिले के सभी विकासखंडों में जड़ी बुटी विशेषज्ञों का सर्वेक्षण कर 157 विशेषज्ञों की सूची तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि यह प्रयास केवल जानकारी का संग्रह नहीं बल्कि परम्परिक चिकित्सा पद्धति के दस्तावेजीकरण की एक सशक्त शुरूआत है।
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