ट्रांसफर की राजनीति पर न्यायालय का प्रहार, पंचायत सचिवों को राहत देने के लिए सरकार को सख्त दिशा-निर्देश
जबलपुर: पंचायत सचिव के स्थानांतरण के राजनेताओं के दबाव में किए जाने का आरोप लगाते हुए एमपी हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि शहडोल कलेक्टर ने नोटशीट के साथ स्थानांतरण के लिए राजनेताओं के हस्ताक्षर के साथ अनुमोदित सूची जिला पंचायत सीईओ को भेजी है। कलेक्टर के द्वारा भेजी गयी नोटशीट सोशल मीडिया में वायरल है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए शासन को जांच प्रतिवेदन पेश करने के निर्देश दिए हैं। युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
शहडोल निवासी ने दायर की थी याचिका
शहडोल निवासी दुर्गा प्रसाद तिवारी की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि पंचायत सचिव के प्रस्तावित स्थानांतरण की सूची उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और विधायक के हस्ताक्षर से अनुमोदित की गयी है। अनुमोदित सूची कलेक्टर ने नोटशीट के साथ जिला पंचायत सीईओ को भेजी है। जिला कलेक्टर द्वारा भेजी गयी नोटशीट सोशल मीडिया पर वायरल है।
ट्रांसफर की यह प्रक्रिया है अनुचित
याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि स्थानांतरण के लिए इस तरह की प्रक्रिया अनुचित है। राजनीतिक दबाव में पंचायत सचिव के स्थानांतरण किया जाना अनुचित है। राजनीतिक दबाव में स्थानांतरण किए जाने की जांच आवश्यक है। याचिका में मप्र शासन के प्रमुख सचिव, शहडोल कलेक्टर, जिला और जनपद पंचायत सीईओ को पक्षकार बनाया गया है। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर यह आदेश जारी किये। याचिका पर अगली सुनवाई 22 सितंबर को निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता सुनंदा केसरवानी ने पैरवी की।
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